Banaras ki galiyon mein

ढूंढती हूँ मैं कुछ यहाँ, कुछ वहांकभी अलमारी में देखा, कभी छज्जे पेतिन के डब्बों में भी  देखा झाँक करयाद आता है कहीं रखा था संजो केक्या […] Read More

Dil chahta hai..

कुछ नया लिखने को दिल चाहता है लगी एक नाव और नदी का बहता पानी, घटाएं घुमड़ती, गुनगुनाती कहानी, दिल अकेला कहाँ मानता है.. कुछ […] Read More